Essay on Holi: होली पर निबंध 1000 शब्दों में|होली पर निबंध

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Essay on Holi: होली पर निबंध 1000 शब्दों में|होली पर निबंध
Essay on Holi in Hindi

Essay on Holi in Hindi: Welcome to my blogs! here you will learn about Essay on Holi in Hindi medium .

वसंत ऋतू के आते ही प्रकृति झूमने लगती है और इसी ऋतू में वसंत उत्सव यानि होली का त्यौहार आता है . वैसे तो होली को रंगों का त्यौहार कहा जाता है लेकिन यह त्यौहार आपसी भाईचारे तथा हर्ष और उल्लास का त्यौहार है . क्योकि यह त्यौहार हर किसी के जीवन में एक नया रंग घोलता है .

होली पर निबंध 200 शब्दों में

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होली का त्यौहार हिन्दुओं का प्रसिद्द त्यौहार है . यह त्यौहार वसंत ऋतू के आगमन पर मनाई जाती है . यह त्यौहार फाल्गुन महीने के पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है .होली का त्यौहार तीन दिन तक चलने वाला त्यौहार है . यह त्यौहार होलिका दहन से शुरू होती है . और उसके अगले दिन धुलेंडी का त्यौहार आता है . उस दिन सभी लोग आपस में धूल से होली खेलते है . धुलेंडी के अगले दिन होली का त्यौहार आता है . इस दिन सभी लोग बच्चे-बूढ़े तथा युवा औरत तथा मर्द सभी मिलकर रंग-अबीर तथा गुलाल के साथ होली खेलते है .

यह त्यौहार खाने पिलाने का त्यौहार भी कह सकते है . क्योकि होलिका दहन के एक दिन पहले से ही सब्जी के घरों में पुआ बनाई जाती है जो चने के बेसन के होते है . सभी लोग अपने घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाते है और खाते और खिलाते है . होलिका दहन पर वे सभी प्यार से पकवान को भी चढ़ाते है . उसके अगले दिन सभी ढोलक और मंजीरा बजाते हुए सभी के घर जाते है और पुआ पकवान खाते है और खिलाते है .

होली का त्यौहार आपकी भाईचारे का सन्देश देती है . क्योकि यही एक त्यौहार है जिसमे लोग एक दूसरे के घर जाते है रंग लगाते है खाते है और खिलाते है .

Essay on Holi in English 10 lines

  1. Holi is the famous Hindu festival.
  2. It is also called a festival of colors.
  3. Holi festival falls every year in March months.
  4. As per the Hindi calendar holi comes on full moon in falguna months.
  5. Holi festival is the symbol of the spring season’s arrival.
  6. This festival starts with Holika Dahan and lasts after playing color.
  7. In this festival, children and adults are playing color and gulal with each other.
  8. In this festival, people make and eat delicious pakode and gunjhia, etc.
  9. in this festival, people beat drums and sing a phagwa geet .
  10. Holi message a brotherhood and they eat and dance and enjoy each other.
त्यौहार का नाम होली का त्यौहार
कब मनाया जाता है ? वसंत ऋतू में
कब मनाया जाता है ? फाल्गुन महीने के पूर्णिमा पर
मनाता है . भारत के अलावा नेपाल में भी
होली के अन्य नाम फगुआ , धुलेंडी,छारण्डी, ढोल, रंग पंचमी
शुरुआत वसंत पंचमी तथा होलिका दहन से
कहा जाता है . रंगों का त्यौहार
बजाते है . ढोल, झेल तथा मंजीरा
खाते और खिलाते है पकोड़े, गुंझिया तथा पुआ
होलिका दहन 2025 13 मार्च गुरूवार
होली 2025 14 मार्च शुक्रवार

होली पर निबंध 300 शब्दों में

होली वसंत उत्सव के आगमन में मनाया जाता है . इस अवसर पर प्रकृति एक नए रूप में नजर आती है . इस अवसर पर सभी लोग मदमस्त होकर होली का त्यौहार मनाते है . होली को फगुआ, फ़ाग , रंग पंचमी , ढोल तथा धुलेंडी विभिन्न नामों से लोग जानते है . लेकिन सब का मकसद एक है रंगों का त्यौहार . यह त्यौहार यानि इस त्यौहार में लोग रंग , अबीर और गुलाल एक दूसरे को लगाते है . लेकिन बरसाने की होली तो बहुत ही विचित्र होती है यहाँ तो लाठी से मारकर होली मनाया जाता है . होली का त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस त्यौहार को पुरे देश में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है . इस पर्व की शुरुआत होलिका दहन से होती है जिसे छोटी होली कहते है .

होलिका दहन के दूसरे दिन धुलेंडी कहते है जिसे बड़ी होली भी कहते है . यह दिन फाल्गुन महीने के पूर्णिमा तिथि होती है . इस दिन लोग एक-दूसरे को प्रेम से रंग तथा गुलाल लगाते है . इस दिन सभी के घरों में तरह-तरह के पकवान बनते है वे कहते है और एक दूसरे को खिलाते है . साल 2025 में होलिका दहन 13 मार्च दिन गुरुवार को मनाया जाएगा और धुलेंडी अगले दिन 14 मार्च दिन शुक्रवार को होगा . होली का त्यौहार समस्त भारतबर्ष में मनाया जाता है . भारत के अलावा इसे नेपाल तथा बांग्लादेश में भी मनाया जाता है . वैसे तो जहाँ जहाँ भारतीय जिस देश में है वहां होली का त्यौहार मनाया जाता है .

होली पर आधारित पौराणिक कथाएं

होली त्यौहार पर कई कथाएं आधारित हैं जैसे: भक्त प्रह्लाद तथा होलिका दहन की कथा, राधा-कृष्ण की कथा, शिव-पार्वती और कामदेव की कथा. हिंदू धार्मिक पौराणिक ग्रंथों के अनुसार हिरण्यकश्यप की कहानी बहुत प्रचलित है . इस कहानी में भक्त प्रह्लाद हिरण्यकश्यप राक्षस का बेटा था. हिरण्यकश्यप ने तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा था की उसे कोई अस्त्र शस्त्र से नहीं मरेगा , न वह रात में, न दिन में, न धरती में, न आकाश में. यह वरदान मिलने के बाद हिरण्यकश्यप को लगा कि वह अमर हो चुका है. उसने अपने छोटे भाई का बदला लेने के लिए देवताओं को परेशान किया.

हिरण्यकश्यप का पुत्र था जिनका नाम था प्रह्लाद . हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अध्य्यन के लिए गुरु आश्रम में भेजा लेकिन राक्षस का पुत्र होने के बावजूद भी प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था वह हमेशा भगवान् विष्णु का नाम जप्त रहता था ओम नमः भगवते वासुदेवाय .

हिरण्यकश्यप ने गुरु को आदेश दिया की इसे हमारी ही नाम लेना है . लेकिन बालक प्रहलाद की हरि भक्ति की भक्ति में हमेशा लीन रहता . पहले तो हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को पूछा की तुम विष्णु का नाम क्यों लेते हो . तब प्रह्लाद ने हिरण्यकश्यप को बताया कि सबसे श्रेष्ठ भगवान हरि हैं इसलिए वो उनकी ही पूजा आराधना करेगा. प्रहलाद ने हिरण्यकश्यप को हरि का ज्ञान करवाया. लेकिन वरदान के मद में चूर हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र को मारने की ठान ली. हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को बहुत समझाया लेकिन प्रह्लाद ने भगवान की भक्ति नहीं छोड़ी. इसके बाद हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को यातनाएं देनी शुरु कर दी. हिरण्यकश्यप ने अपने सेवकों को प्रहलाद को मारने का आदेश दे दिया. प्रह्लाद पर तीर, भाले, अस्त्र शस्त्र से वार किये गए, लेकिन प्रह्लाद के शरीर पर कोई असर नहीं पड़ा. हिरण्यकश्यप ने परेशान होकर प्रह्लाद को हाथी के पांव के नीचे कुचलने का आदेश दिया. लेकिन हाथियों ने भी प्रह्लाद को नहीं मारा. शेर, विष और हथियार का भी असर नहीं हुआ.

हिरण्यकश्यप की बहन होलिका थी जिनको भगवान् विष्णु से वरदान स्वरुप एक चादर मिली हुई थी . उस चादर को अग्नि भी नहीं जला सकती थी . हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भी प्रह्लाद को लेकर जलती चिता पर बैठी. होलिका को अग्नि में ना जलने का वरदान मिला था लेकिन उसका वरदान भी काम ना आया. उस अग्नि में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भस्म हो गई. इसी दिन से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई. और इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की जीत की याद में तभी से ही होली का त्योहार मनाया जा रहा है।

होली पर राधा-कृष्ण की कथा

भगवान् कृष्णा और राधा का प्रेम प्रसंग भी होली से जुड़ा हुआ है . आपने सुना होगा मैया मै काला और राधा गौरी . इससे तात्पर्य यह है की राधा ने भगवान् श्री कृष्णा को काला कहकर चिढ़ाते रहते थे .ऐसी मान्यता है की भगवान् श्री कृष्णा का रंग सावला था और राधा रानी गौरी थी .

छोटे से कान्हा ने मैया से इस बात की शिकायत कई बार की लेकिन मैया उन्हें समझा-बुझाकर हमेशा टालती रही . लेकिन जब वह नहीं माने तो मैया ने यह सुझाव दिया तब तक होली का भी त्यौहार आ गया था . कि जो तुम्हारा रंग है, उसी रंग को राधा के चेहरे पर भी लगा दो। तब तुम्हारा और राधा का रंग एक जैसा हो जाएगा। फिर वो तुम नहीं चिढ़ा पाएगी . नटखट कृष्ण को मैया का यह सुझाव बहुत पसंद आया और उन्होंने अपने सखा ग्वाल-बाल मित्रों के संग मिलकर कुछ अनोखे रंग तैयार किए और ब्रज में राधा रानी को रंग लगाने पहुंच गए। श्री कृष्ण ने साथियों के साथ मिलकर राधा और उनकी सखियों को जमकर रंग लगाया और खूब होली खेली । ब्रज वासियों को उनकी यह शरारत बहुत पसंद आई और तब से रंग वाली होली का चलन शुरू हो गया। जिसे आज भी उसी उत्साह के साथ खेला जाता है।

होली त्यौहार पर आधारित एक और कहानी है जो भगवान शिव से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान् इंद्र ने कामदेव को भगवान शिव की तपस्या भंग करने का आदेश दिया। कामदेव ने उसी समय वसंत को याद किया और अपनी माया से वसंत का प्रभाव फैलाया, इससे सारे जगत के प्राणी काम वासना से वशीभूत होकर मोहित हो गए। कामदेव के द्वारा भगवान् शिव को मोहित करने का यह प्रयास होली तक चला। होली के दिन भगवान शिव की तपस्या भंग हुई। तो भगवान्उ शिवजी अत्यंत क्रोधित हो गए . और उनकी तीसरी नेत्र खुल गए जिससे कामदेव को भस्म कर दिया तथा यह संदेश दिया कि होली पर काम (मोह, इच्छा, लालच, धन, मद) इनको अपने पर हावी न होने दें। तब से ही होली पर वसंत उत्सव एवं होली जलाने की परंपरा प्रारंभ हुई। इस घटना के बाद शिवजी ने माता पार्वती से विवाह की सम्मति दी। जिससे सभी देवी-देवताओं, शिवगणों, मनुष्यों में हर्षोल्लास फैल गया। उन्होंने एक-दूसरे पर रंग गुलाल उड़ाकर जोरदार उत्सव मनाया, जो आज होली के रूप में घर-घर मनाया जाता है।

होली त्यौहार का महत्व

होली का त्यौहार हमारे नीरस रूपी जीवन अनेक रंग घोलती है . यह त्यौहार एक-दूसरे के प्रति मेल-मिलाप और सौहार्द का त्यौहार है . होली पर के दिन ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। या फिर किसी एक जगह पर होली मिलान का आयोजन भी किया जाता है . होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और एकता का संदेश देते हैं।

होली 10 लाइन

होली 10 लाइन क्या है? आइये जानते है :

  1. होली का त्यौहार हिन्दू धर्म का प्रसिद्ध त्यौहार है .
  2. होली रंगों का त्यौहार है लेकिन इसे अलग अलग नामों से जानते है जैसे : फगुआ , धुलेंडी,छारण्डी, ढोल, रंग पंचमी आदि
  3. होली का त्यौहार बसंत ऋतू के आगमन पर मनाया जाता है .
  4. यह त्यौहार फाल्गुन महीने के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है .
  5. होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई का जीत का त्यौहार है .
  6. इस त्यौहार पर सभी के घरों में तरह-तरह के पकवान बनाये जाते है तथा खाते है और खिलाते है .
  7. इस त्यौहार पर लोग एक-दूसरे के घर-घर जाकर रंग और गुलाल लगते है और आपसी भाईचारे का सन्देश देते है .
  8. शहरों में लोग घर -घर न जाकर किसी एक जगह पर होली मिलान समारोह का आयोजन रखते है वही सभी एकत्रित होकर आपसी भेद-भाव मिटाकर होली खेलते है .
  9. होली का त्यौहार होलिका दहन से शुरू होता है .
  10. होली का त्यौहार सभी के जीवन में एक नई उमंग , एक नई आशा तथा जीवन में रंगों का संचार करती है .
FAQs

Q. होली पर निबंध कैसे लिखें हिंदी में?
Ans: होली पर निबंध लिखने के लिए सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी सरल भाषा में लिखें .

Q. होली का मुख्य संदेश क्या है?
Ans: यह रंगों का त्यौहार है और भाईचारे का सन्देश देती है .

Q. होली क्यों मनाई जाती है?
Ans: होली का त्यौहार को बुराई पर अच्छाई का जीत का प्रतीक है . भक्त प्रह्लाद पर लाख संकट आया लेकिन फिर भी उसने भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा .

Q. होली का हमारे जीवन में क्या महत्व है?
Ans: यह त्यौहार हमारे जीवन में आशा का संचार करती है . हमारे जीवन में इंद्रधनुष के सातों रंग घोल देती है . लोग आपसी रंजिश को भूलकर गले मिलते है .

Q. होली रंगों का त्योहार क्यों है?
Ans: क्योकि यह बसंत ऋतू के आगमन का प्रतिक है और इस त्यौहार में बड़े-बूढ़े सभी मिलकर एक-दूसरे को रंग तथा गुलाल लगाते है . इस त्यौहार में सभी मदमस्त हो जाते है .

Q. होली के त्योहार से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
Ans: होली से हमें ये शिक्षा मिलती है की बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो आखिर जीत अच्छाई की ही होती है .

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